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स्कूलों पर लाखों का कर्ज, न खाने के पैसे, न खाना पकाने के लिए | स्कूलों पर लाखों का कर्ज, न खाने के पैसे, न खाना बनाने के लिए Indian_Samaachaar

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योजना के तहत ये प्रावधान गेहूं और चावल विभाग द्वारा दिए गए हैं। सामग्री की मात्रा से दाल, सब्जी, तेल, मसाले आदि बाजार से खरीदे जाते हैं। इसके अलावा प्रत्येक गुरुवार को फल देने का भी प्रावधान है।

रसोइया भी भुगतान का इंतजार कर रहे हैं, शिक्षा विभाग की जानकारी के मुताबिक इस योजना के तहत स्कूलों में खाना बनाने वाले रसोइयों को भी तीन महीने से मानदेय नहीं दिया गया है. जिले में 2432 रसोइया सह सहायिका हैं, जिन्हें 1742 रुपये प्रतिमाह मानदेय देने का प्रावधान है, लेकिन भुगतान न होने से उन्हें आर्थिक दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है.

उनका कहना है कि स्कूलों में पोषाहार का पैसा लगाया जाए। छह माह से पैसे नहीं मिलने से दुकानदारों में शिक्षकों के प्रति गलत धारणा पैदा हो गई है। सामग्री की मात्रा नहीं मिलने से हर बार परेशानी होती है। इससे पोषाहार का जिम्मा संभालने वाले शिक्षकों को सामग्री लाने के लिए अपना पैसा खर्च करना पड़ रहा है।

पंचायती राज कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष राजेश शर्मा ने बताया कि अब तक उपलब्ध राशि के अनुसार बेसड़ी व सरमथुरा में सितंबर तक की राशि का भुगतान कर दिया गया है. राजखेड़ा में भी जुलाई तक भुगतान कर दिया गया है। राशि मिलते ही शेष ब्लॉक में भी भुगतान कर दिया जाएगा। सभी खातों को सिंगल नोडल एजेंसी पोर्टल पर भी अपडेट कर दिया गया है।

केदार गिरी गोस्वामी, जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक, धौलपुर

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