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कुनो मध्य प्रदेश में चीता परियोजना | प्रदेश के इस अभयारण्य में कदम रखेंगी चीतों की अगली पीढ़ी Indian_Samaachaar

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दरअसल, अभी कुछ महीनों तक विशेषज्ञ उन पर नजर रखेंगे। उन पर क्या परिवर्तन हो रहे हैं और उनके अनुकूलन की स्थिति क्या है। अगर यह सब ठीक रहा तो इन चीतों की अगली पीढ़ी नौरादेही अभयारण्य में बस सकती है। यह कहना है राज्य के वन मंत्री कुनार विजय शाह का जो नौरादेही अभयारण्य पहुंचे। वे रविवार रात जबलपुर से तेंदूखेड़ा होते हुए भोपाल लौटते समय नौरादेही अभ्यारण्य पहुंचे थे। जहां उन्होंने डीएफओ सुंधाशु यादव से मुहाली रेंज स्थित विश्राम गृह में रात बिताने के बाद अभयारण्य क्षेत्र में स्थित गांवों के विस्थापन की जानकारी ली. वहीं वन मंत्री की सूचना मिलते ही अभयारण्य क्षेत्र से विस्थापित हुए ग्रामीण उनके पास पहुंच गए. जहां वन मंत्री ने भी एक-एक कर आम आदमी की समस्याएं सुनीं, उनकी समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान करने का आश्वासन दिया.

उन्होंने वन विभाग व अन्य अधिकारियों सहित ग्रामीणों से भी विस्थापित होने पर चर्चा की और आश्वासन दिया कि विस्थापन के दौरान उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा. वहीं अधिकारियों ने वन मंत्री से मुलाकात कर वन कर्मचारियों की फील्ड समस्याओं व वेतन विसंगतियों को दूर करने पर चर्चा की. इस पर वन मंत्री ने जल्द से जल्द समस्याओं का समाधान करने और वन कर्मचारियों को मजबूती से काम करने के निर्देश दिए हैं.

वन मंत्री ने कहा कि अन्य महाद्वीपों से भारत के कुनो में आए चीतों पर वन्यजीव विशेषज्ञ नजर रखे हुए हैं. अफ्रीकी चीतों पर जलवायु का क्या प्रभाव पड़ेगा? इसका अध्ययन करने के बाद इस पर फैसला लिया जाएगा। अगर सब कुछ ठीक रहा तो नौरादेही अभयारण्य को विस्थापित करने के लिए अगली पीढ़ी के चीतों पर भी विचार किया जा सकता है।

नौरादेही में राधा-किशन के परिवार के 12 सदस्य होने पर खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने टीम को बधाई दी है. वन मंत्री ने कहा कि नौरादेही में टाइगर रिजर्व के प्रस्ताव पर राज्य सरकार द्वारा वन विभाग के विशेषज्ञों की कमेटी गठित की गयी है. यह समिति नौरादेही अभ्यारण्य में आकर बाघों के लिए आवश्यक आवास की सुरक्षा, उनके आहार के लिए पशुओं की उपलब्धता की व्यवस्था का अध्ययन करेगी। अगर सभी मापदंड सही पाए गए तो यह अभयारण्य भी राज्य का नया टाइगर रिजर्व बन जाएगा।

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